खतरनाक घाटों पर गोताखोर रहे तैनात
विधि-विधान से सूर्योपासना कर व्रतियां एवं श्रद्धालु अपने-अपने घर लाैट आए। शनिवार की सुबह 3:00 बजे से ही व्रतियांं और श्रद्धालु घाटों पर पहुंच कर सूर्य देवता की उपासना शुरू कर दी। इसके बाद सूर्य देवता का इंतजार शुरू हुआ। सूर्योदय होने के बाद अर्घ्य का सिलसिला जारी रहा।
कोरोना संक्रमण लेकर जो गाइडलाइन जारी की गई थी। उसका असर छठ घाटों, तालाब एवं नदी किनारे पर देखने को मिला। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार भीड़ कम थी। लोगों की सुरक्षा के लिए खतरनाक घाटों पर गोताखोरों की तैनाती की गई थी। पतरघट प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही थी।
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