40 साल बाद भी भागलपुर के चर्चित अंखफोड़वा कांड के पीड़ितों को नहीं मिला पुनर्वास, सुप्रीम कोर्ट में अर्जी
भागलपुर का चर्चित अंखफोड़वा कांड फिर गरमाने वाला है। इस कांड को दुनिया के सामने लाने वाले वकील रामकुमार मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में अब इनके पीड़िताें के पुनर्वास के लिए अर्जी लगाई है। भीखनपुर निवासी मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर अब पीड़ितों के पुनर्वास की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि 40 साल बाद भी पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था राज्य सरकार ने नहीं की है। पूर्व में तय 750 रुपए की पेंशन राशि भी जिंदा पीड़ितों को जुलाई 2019 से नहीं मिल पा रही है। पीड़ितों ने भागलपुर के डीएम से इसकी शिकायत की थी, लेकिन मिला भरोसा अमल में नहीं आ सका है।
जुलाई 2019 से ही पीड़िताें काे नहीं मिल रही 750 रुपए पेंशन
1980 में सुप्रीम कोर्ट से मिला था न्याय
वकील मिश्रा ने चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में सितम्बर 1980 के उस पल का जिक्र किया है। न्यायालय में लखन मंडल और अनिल यादव को रिमांड के लिए लाया गया था। उनकी आंखों से ताजा रक्त टपक रहा था। उन्होंने पुलिस पर मुकदमा चलने की अनुमति मांगी पर तब अनुमति नहीं मिली थी। तब उन्होंने 25 सितंबर 1980 को बड़ी अदालत में वरीय अधिवक्ता कपिला हिंगोरानी को इस संबंध में पत्र भेजा था। उन्होंने पत्र को तत्कालीन चीफ जस्टिस के समक्ष रखा था। उन्होंने उस पत्र को याचिका मान लिया था। सर्वोच्च न्यायालय की पहल पर ही सारे पीड़ताें का उपचार हुआ था अाैर उन्हें मुआवजा दिया गया था। उनके पुनर्वास का आदेश भी दिया गया था, लेकिन आज तक पीड़ताें के पुनर्वास के लिए कुछ नहीं किया गया।
1979-80 में 33 लाेगाें की आंखों में डाला गया था एसिड
1979 से 1980 के बीच पुलिस ने 33 लोगों को बदमाश बताकर उनकी आंखाें में एसिड डाल दिया था। इसे ‘गंगाजल’ का नाम दिया गया था। जिंदा बचे पीड़ताें में उमेश यादव, भोला चौधरी, पटेल साह, मंटू हरि, पवन कुमार सिंह, सहदेव दास, शंकर तांती, शैलेश तांती, वसीम मियां, चमक लाल यादव, सल्लो बेलदार, कमल तांती, लखन मंडल, सुरेश साह, शालीग्राम साह, रमण बिंद और उमेश यादव शामिल हैं।
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