नासिक मंडी में 80 रुपए किलो प्याज बिहार में 2 दिन में 100 के पार होगा, सिर्फ चुनाव के दौरान दोगुनी हो गईं प्याज की कीमतें
राजनीति के महासमर में प्याज की ‘झांस’ ऐसी लगने लगी है कि धुर विरोधी राजद और जदयू की बोली कमोबेश एक हो गई है। पिता की तर्ज पर तेजस्वी ने कहा... अब त पियजवो अनार हो गइल... का करेंगे राजग सरकार में यह होना ही है।कालाबाजारियों के हाथ में प्याज की अर्थव्यवस्था चली गई है।
दूसरी ओर, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि प्याज की कीमतें बढ़ना उपभोक्ताओं के लिए चिंताजनक है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि केंद्र सरकार इस बारे में तत्काल कार्रवाई करेगी, ताकि लोगों को सस्ते दर पर प्याज उपलब्ध हो सके। गौरतलब है कि सिर्फ तीन दिन में ही प्याज की कीमतें 20 रुपए तक बढ़ चुकी हैं।
अभी थोक में प्याज 65-70 और फुटकर में 75-80 चल रहा है। ...और बाजार पर नजर रखने वालों की मानें तो कीमतें अगले दो-तीन दिन में 100 रुपए से पार जा सकती हैं क्योंकि मंगलवार को नासिक की मंडी में प्याज की कीमतें 80 रुपए पहुंच गईं। वहीं, अनार का भी थोक भाव 80 रुपए किलो ही है।
प्याज के रेट में यह उछाल बीते एक माह में आया है। रेट दोगुना हो गया है। थोक मंडी में प्याज 18 अक्टूबर को 40 से 45 रुपए किलो था और मंगलवार को 65 से 70 रुपए प्रति किलो पहुंच गया। दरअसल, प्याज की कीमतों में वृद्धि के मूल में बारिश के कारण 40 प्रतिशत तक फसल बर्बाद होना है।
राजग सरकार में आम जन हाशिए पर, किसी को चिंता नहीं: तेजस्वी
महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा नौजवान, किसान और मजदूर के बाद मध्यम वर्ग खासकर गृहणियां एनडीए के निशाने पर हैं। कालाबाजारियों के हाथ में प्याज की अर्थव्यवस्था ही सौंप दी गई है। चुनाव जीतने की चिंता में भाजपा और जदयू ने आम आदमी को हाशिये पर डाल दिया है। जाप नेता पप्पू यादव का कहना है कि कालाबाजारी से कीमतें बढ़ी हैं। जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि प्याज की कीमतें बढ़ना उपभोक्ताओं के लिए चिंताजनक है।
देश में 2.5 करोड़ टन का उत्पादन इस बार 40% फसल हुई बर्बाद
1. देश में प्याज का औसत उत्पादन 2.5 करोड़ टन होता है। सबसे बड़ा हिस्सा 37 प्रतिशत महाराष्ट्र, 16 फीसदी एमपी और 12 फीसदी कर्नाटक उत्पादन करता है। राजस्थान-गुजरात की भी प्याज उत्पादन में बड़ी भागीदारी है। इस बार बारिश और बाढ़ से में प्याज की करीब 40 प्रतिशत फसल बर्बाद हुई है।
बारिश से हुए नुकसान से आलू की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई
2. बरसात से हुए नुकसान से आलू की कीमत बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत फसल कम हुई। दो माह में आलू की कीमत थोक में 28 से 35 रुपए पहुंच गई। खुदरा में आलू 44 से 50 रुपए किलो तक बिक रहा है। हालांकि उम्मीद है इसे लेकर सरकार कुछ राहत देगी।
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