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अनादि शक्ति माता सर्वेश्वरी का सातवां विग्रह विराजमान है

दक्ष प्रजापति क्षेत्र व हरिहर क्षेत्र की सीमा पर स्थित नयागांव थाना क्षेत्र के डुमरी बुजुर्ग गांव में विराजमान है,अनादि शक्ति माता सर्वेश्वरी का सातवां विग्रह, भगवती मां कालरात्रि। मर्यादा पुरुषोत्तम राम, अघोराचार्य बाबा कीनाराम, औघड़ेश्वर बाबा भगवान राम व क्रीं कुंड शिवधाम, वाराणसी की आराध्या मां सर्वेश्वरी का सातवां विग्रह गंगा-माही के संगम अपनी भव्यता व लोक आस्था के कारण न सिर्फ कर्मवार वंशीय ठाकुरों की कुलदेवी हैं बल्कि सर्वपूजित सर्वेश्वरी हैं। बहरहाल, भादो की अमावस्या को वार्षिक पूजनोत्सव पर मुख्यमंत्री से लेकर संतरी तक मत्था टेकते हैं और सबों के मनोरथ पूर्ण करती हैं, माता कालरात्रि।
शास्त्रीय प्रमाण
यद्यपि मंदिर और विग्रह को लेकर कहीं कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। गंधर्व संहिता में वर्णित शुकर क्षेत्र, कुरुक्षेत्र, पलास क्षेत्र में मूर्धन्य हरिहर क्षेत्र की पश्चिमी सीमा व दक्ष प्रजापति क्षेत्र की पूर्वी सीमा पर स्थित मां कालरात्रि मोक्षदायिनी और विजयदायिनी है। मार्कण्डेय पुराण, देवी भागवत,कालिका पुराणादि के अनुसार त्रिगुणात्मक शक्तियों में तमोगुणी शक्ति ही कालरात्रि, चंडिका, चंडी, चामुंडा, तारा, छिन्न मस्तिष्क हैं।

भाषा विद् डाक्टर राजेश्वर सिंह राजेश, स्तंभकार अधिवक्ता विश्वनाथ सिंह प्रभृति विद्वानों के अनुसार तत्सम शोणितपुर का तद्भव सोनपुर है,जो द्वापर युग में असुरराज वाणासुर की राजधानी थी और उसकी कुलदेवी चामुंडा थी जो कालांतर कालरात्रि संज्ञा के साथ विग्रह रूप में विद्यमान हैं।

ऐतिहासिक प्रमाण: 1193 में हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद राजपूतों ने नए राज्य निर्माण के लिए अरण्यक क्षेत्रों के लिए प्रस्थान किया । गड़खा प्रखंड के सात पट्टी बसंत में चौहान, बारह गांवा दिघवारा मे नौ गांव दीक्षित वंशीय नेवतनी, तीन गांव में कुश वंशीय तथा डुमरी बुजुर्ग, खरिका तक कर्मवार ठाकुरों ने अपना शासन कायम किया। डुमरी-बुजुर्ग और शोभेपुर के बीच माही नदी के तट पर ‘सारणगढ़’ का किला अब भी टिला के रूप में है।

तत्कालीन हरिपुर में राजा शिव सिंह की पराजय के बाद बाद हाजी इलियास की तुर्क अफगानी फौज सोनपुर की ओर कूच की और सारणगढ़ पर हमला बोल दिया। कर्मवार ठाकुरों ने मां कालरात्रि का आह्वान किया और विजयदायिनी मां प्रकट होकर विधर्मियों के सिरच्छेदन का आदेश व वरदान दी। बस क्या था? क्षात्र तेज व उत्साह से उत्साहित राजपूत रणव्याघ्र टूट पड़े, मलेक्षों पर और काट डाला तुर्क अफगानी फौज को।

मंदिर निर्माण: मंदिर के पुजारी व पूर्व मुखिया गोरखनाथ मिश्र के अनुसार माँ की पिण्डी 500 वर्ष पुरानी है। अमनौर, दरौली, बलिया, कर्मवारी पट्टी, आमी, खरिका आदि के कर्मवार ठाकुरों व 36 कुल के ठाकुरों के सहयोग से त्यागी बाबा के नेतृत्व में मंदिर निर्माण हुआ लेकिन भव्यता शेष है।



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Anadi Shakti is the seventh Deity of Mata Sarveshwari.


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